मन करता है, खुले आसमानों के नीचे बैठूं
बहते हुए झरनो के पास बैठूं I
खुले आसमानों में पंछियों को उड़ते देखूं,
हरे - भरे वृक्षों कि छाया में बैठूं ll
एक ऐसी जगह हो वो, जहां का वातावरण
बिल्कुल शांत हो l
आवाज़ केवल पंछियों के चहचहाने की हो,
जिसे सुनकर भी मन्न को शांति मिले,
जहां से ढलता हुआ सूरज भी साफ दिखे ll
एक ऐसी जगह हो वो जहां मन को बहुत सुकून मिले l
जहां मुझे प्रकर्ती को जानने का एक मौका मिले ll
ऐसी जगह हो वो जहां जाकर अपने आप से ही
ढेर सारी बाते करू l
कुछ प्राकतिक के साथ बैठकर समय बिताऊ,
तो कुछ उड़ते हुए पंछीयों को देखकर
आसमान के उन नजारो में खो जाऊं ll
मन करता है खुले आसमानो के नीचे बैठूं ll
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