ये दिल थोड़ा बेचैन सा हो जाता है ,,
शायद इस दिल को तेरी मौजूदगी की आदत सी हो गयी है l
अपने आप को तो मना लेंगे,
इस दिल को कैसे मनाएंगे,,
जो हरपल तेरे दीदार को तरसता है ,
जो तुझसे बेपनाह मोहब्बत करता है II
ये दिल थोड़ा बेचैन सा हो जाता है ,,
शायद इस दिल को तेरी मौजूदगी की आदत सी हो गयी है l
अपने आप को तो मना लेंगे,
इस दिल को कैसे मनाएंगे,,
जो हरपल तेरे दीदार को तरसता है ,
जो तुझसे बेपनाह मोहब्बत करता है II
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