के मन है मेरा तितली सा,  à¤–ुले आसमानों में उड़ना चाहता है,  à¤…पने पंखों को फैलाकर ,   ऊंचाइयों को छूना चाहता है,  à¤œो देखें है सपने मैंने   à¤‰à¤¨्हें पूरा…

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