बचपन गया लेकिन बचपना नहीं।
वो रोते हुए स्कूल जाना, और खिलखिलाते हुए
छुट्टी में स्कूल से घर आना।
वो स्कूल में छुट्टी की बेल बजते ही खुश होना,
और ज़ोर से चिल्लाना, और
छुट्टी में रुककर भाईयो का इंतजार करना,
वो स्कूल की सारी बाते करते हुए साथ में घर आना।
घर आते ही मम्मी से खाना मांगना,
खा पीकर सोने के बाद शाम को खेलना।
रात में स्कूल का होमवर्क करने के लिए
साथ में बैठना।
वो ढेर सारी बातें करना,
बहुत याद आते है वो दिन।
पूरे हफ्ते स्कूल जाने के बाद एक खुशी जो Sunday सुनकर मिलती थी,
इतनी खुशी यह जानकर की कल
Sunday hai,
उसमें भी teachers इतना सारा homework
दे देती थी।
इतना सारा homework देखकर थोड़ी सी दुःखी, और
ढेर सारी खुशी Sunday की।
बहुत याद आते है बचपन के वो दिन।।
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