बातों में तेरी, बचपना सा लगता है,

 हरकतों से तू, नासमझ सा लगता है,

 जानती हूं, तू बहुत बड़ा हो गया है, पर

 दिमाग से अभी, तू कच्चा सा लगता है।


 तुझसे कितनी भी बातें कर लूं,

 जी ही नही भरता,

 तेरी सूरत से अपनी निगाहें हटाने का 

 जी ही नही करता,,

 फिर भी, तुझसे लड़ना बहुत अच्छा लगता है,

 फिर भी, तुझपर गुस्सा करना बहुत अच्छा लगता है,

 क्या करे, तेरी बातों में नटखट पन सा जो लगता है।।