आज़ाद दिल के पंछी है हम,

 हमे पिंजरों में नही कैद होना।


 हमे आसमान में उड़ने दो,

 अपने पंख फैलाने दो।

 ऊंची उड़ाने उड़ने दो।।


 समय हमारा है मुश्किल में,

 हमे भी थोड़ा जीने दो।


 थोड़ा देदो साथ हमारा,

 पिंजरों में अब नहीं, हमे है रहना।।


 थोड़ा दाना हमारे लिए भी, 

 थोड़ा पानी हमारे लिए भी,

 अपने घरों के छतों पर, बना दो

 थोड़ी जगह हमारे लिए भी।।


 प्यार है अगर पक्षियों से,

 तो समझो हमारे दिल की बात,

 हमे तो रहना है आज़ाद।।


 खत्म हो रहे है हम

 अगर हम ना होंगे,

 तो किसे ढूंढोगे आकाश में तुम।


 हमे भी जीना है दुनिया में,

 पिंजरों में नही होना है, कैद हमे।।